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Showing posts from April, 2024

जुड़वाँ मगर एक-दूसरे से बिलकुल अलग- याकूब-और-एसाव

Kahani 17 जुड़वाँ मगर एक-दूसरे से बिलकुल अलग यहाँ इन दोनों लड़कों को देखिए। वे एक-दूसरे से कितने अलग हैं, है ना? क्या आप इन दोनों के नाम जानते हैं? जो लड़का तीर से निशाना लगा रहा है, उसका नाम एसाव है। और जो भेड़ों की देखभाल कर रहा है, उसका नाम है याकूब। एसाव और याकूब, इसहाक और रिबका के जुड़वाँ बेटे थे। एसाव, इसहाक का दुलारा बेटा था। क्यों? क्योंकि वह एक अच्छा शिकारी था और परिवार के खाने के लिए शिकार करके लाता था। मगर रिबका याकूब को ज़्यादा प्यार करती थी, क्योंकि वह बहुत ही शांत बच्चा था और किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करता था। उस समय उनका दादा इब्राहीम ज़िंदा था। वह ज़रूर याकूब को यहोवा के बारे में बताता होगा और अपनी कहानी भी सुनाता होगा कि यहोवा कैसे उसकी मदद करता था। यह सुनकर याकूब को कितना मज़ा आता होगा। फिर जब इब्राहीम 175 साल का हुआ, तो उसकी मौत हो गयी। उस समय एसाव और याकूब 15 साल के थे। जब एसाव 40 साल का हुआ तो उसने कनान देश की दो औरतों से शादी कर ली। इससे इसहाक और रिबका को बहुत दुःख हुआ, क्योंकि ये औरतें यहोवा को नहीं मानती थीं। उस ज़माने में ऐसा होता था कि घर के सबसे बड़े बेटे ...

इसहाक को मिली अच्छी पत्नी-इसहाक-और-रिबका

इसहाक को मिली अच्छी पत्नी   कहानी 16 इसहाक को मिली अच्छी पत्नी इस तसवीर में आप जिस औरत को देख रहे हैं, जानते हैं वह कौन है? वह रिबका है। और वह जिस आदमी से मिलने आ रही है, वह इसहाक है। रिबका की इसहाक से शादी होनेवाली है। लेकिन यह सब हुआ कैसे? बात यह थी कि इसहाक का पिता, इब्राहीम चाहता था कि उसके बेटे की शादी किसी अच्छी लड़की से हो। मगर वह यह नहीं चाहता था कि उसका बेटा कनान देश की किसी लड़की से शादी करे। क्यों? क्योंकि कनान देश के लोग झूठे देवी-देवताओं की पूजा करते थे। इसलिए इब्राहीम ने अपने एक नौकर को बुलाकर कहा: ‘मैं चाहता हूँ कि तुम हारान शहर में मेरे रिश्‍तेदारों के पास जाओ। और वहाँ मेरे बेटे के लिए एक अच्छी लड़की चुनो।’ इब्राहीम का नौकर फौरन अपने साथ दस ऊँटों को लेकर निकल पड़ा। उसे बहुत दूर जाना था। आखिर में जब वह हारान पहुँचा, तो एक कुएँ के पास रुक गया। शाम होनेवाली थी और इसी समय शहर की औरतें कुएँ पर पानी भरने आती थीं। इसलिए इब्राहीम के नौकर ने यहोवा से प्रार्थना की: ‘हे परमेश्‍वर, ऐसा हो कि जो लड़की मुझे और मेरे ऊँटों को पानी पिलाए, वह वही लड़की हो जिसे तू ने इसहाक की पत्नी बन...

नमक का खंभा

नमक का खंभा   कहानी 15 नमक का खंभा क्या आपको इब्राहीम के भाई का बेटा, लूत याद है? लूत और उसका परिवार इब्राहीम के साथ ही कनान देश में रहता था। एक दिन इब्राहीम ने लूत से कहा: ‘हम दोनों के पास बहुत सारे जानवर हो गए हैं। और यहाँ सबके चरने के लिए जगह काफी नहीं है। तो क्यों न हम अलग-अलग रहें? तुम अपने लिए जगह चुन लो। जिस तरफ तुम जाओगे, मैं उसकी दूसरी तरफ चला जाऊँगा।’ लूत ने अपने चारों तरफ की ज़मीन पर नज़र दौड़ायी। उसने देखा कि यरदन नदी के पास का इलाका बहुत ही बढ़िया है। वहाँ उसके जानवरों के लिए पानी और हरी घास की कोई कमी नहीं थी। इसलिए लूत अपने परिवार और जानवरों को लेकर वहाँ रहने चला गया। आखिर में वे सदोम नाम के एक शहर में रहने लगे। लूत तो अच्छा आदमी था, मगर सदोम में रहनेवाले लोग बहुत बुरे थे। उनकी गंदी हरकतें देखकर उसे बहुत खराब लगता था। परमेश्‍वर भी सदोम के लोगों के बुरे कामों से परेशान था। इसलिए उसने ठान लिया कि वह सदोम और उसके पासवाले शहर अमोरा को नाश कर देगा। क्योंकि अमोरा के लोग भी बुरे काम करते थे। परमेश्‍वर ने दो स्वर्गदूतों को लूत के पास भेजा, ताकि वे लूत को खबरदार कर सकें और उस...

विश्‍वास की परीक्षा

विश्‍वास की परीक्षा   कहानी 14 विश्‍वास की परीक्षा ज़रा इस तसवीर को देखिए। पता है वे दोनों कौन हैं? जिस आदमी के हाथ में चाकू है, वह इब्राहीम है और लकड़ियों के ऊपर लेटा लड़का उसका अपना बेटा है। पर इब्राहीम कर क्या रहा है? ऐसा लगता है कि वह अपने बेटे को मारने जा रहा है। मगर क्यों? यह जानने से पहले आइए देखें कि इब्राहीम और सारा को यह बेटा कैसे हुआ। परमेश्‍वर ने इब्राहीम और सारा से वादा किया था कि उनका एक बेटा होगा। पर ऐसा होना मुश्‍किल लग रहा था, क्योंकि इब्राहीम और सारा बहुत बूढ़े हो चुके थे। फिर भी, इब्राहीम को यकीन था कि परमेश्‍वर के लिए कोई काम मुश्‍किल नहीं। तो क्या परमेश्‍वर ने अपना यह वादा पूरा किया? परमेश्‍वर को इब्राहीम से वादा किए एक साल हो चुका था। उस समय इब्राहीम 100 साल का और सारा 90 साल की थी, तब उनके एक बेटा हुआ। उन्होंने उसका नाम इसहाक रखा। देखा, यहोवा कैसे अपने वादे का पक्का निकला! जब इसहाक बड़ा हुआ, तब परमेश्‍वर ने इब्राहीम की परीक्षा ली। परमेश्‍वर ने इब्राहीम को पुकारा और इब्राहीम ने जवाब दिया: ‘बोलिए प्रभु, क्या आज्ञा है!’ परमेश्‍वर ने उससे कहा: ‘अपने एकलौते बेटे इ...

परमेश्‍वर का दोस्त​—अब्राहम

परमेश्‍वर का दोस्त​—अब्राहम   कहानी 13 परमेश्‍वर का दोस्त​—अब्राहम बाढ़ के बाद, लोग अलग-अलग जगह जाकर रहने लगे। उनमें से एक जगह का नाम था, ऊर। कुछ समय बाद, ऊर में कई पैसेवाले लोग रहने लगे। उस शहर में बड़े-बड़े और सुंदर-सुंदर घर थे। मगर वहाँ के लोग झूठे देवी-देवताओं की पूजा करते थे, ठीक जैसे बाबुल शहर में रहनेवाले लोग करते थे। लेकिन सभी ऐसे नहीं थे। नूह और उसका बेटा शेम अब भी यहोवा को ही मानते थे। बाढ़ के 350 साल बाद, नूह की मौत हो गयी। नूह के मरने के ठीक दो साल बाद, इब्राहीम पैदा हुआ। इब्राहीम बहुत अच्छा आदमी था और यहोवा उससे बहुत प्यार करता था। इब्राहीम अपने परिवार के साथ ऊर शहर में रहता था। उसके पास घर, पैसा, सबकुछ था। एक दिन यहोवा ने इब्राहीम से कहा: ‘तुम इस शहर, ऊर को और अपने रिश्‍तेदारों को छोड़ दो। और उस देश को जाओ, जो मैं तुम्हें दिखाऊँगा।’ क्या इब्राहीम ने परमेश्‍वर की बात मानी? जी हाँ, उसने ऊर शहर छोड़ दिया। इब्राहीम हमेशा परमेश्‍वर की बात मानता था। इसलिए परमेश्‍वर ने उसे अपना दोस्त कहा। जब इब्राहीम ने ऊर शहर छोड़ा, तो उसके परिवार के कुछ लोग भी उसके साथ गए। जैसे, उसकी ...

आसमान से बातें करती मीनार - बाबेल-की-मीनार

आसमान से बातें करती मीनार   कहानी 12 आसमान से बातें करती मीनार धरती पर आयी बाढ़ के बाद नूह के बेटों के कई बच्चे हुए। जब वे बच्चे बड़े हो गए, तो उनके भी बच्चे हुए। इस तरह धरती पर इंसानों की गिनती बहुत बढ़ गयी। उस समय निम्रोद नाम का एक आदमी रहता था। वह नूह के बेटे का पोता था। निम्रोद बहुत ही बुरा आदमी था। वह जानवरों का शिकार करता था और इंसानों को भी मार डालता था। उसने अपने आपको राजा बना लिया। मगर परमेश्‍वर को निम्रोद पसंद नहीं था। उस समय सब लोग एक ही भाषा बोलते थे। और निम्रोद चाहता था कि वे सब-के-सब एक जगह पर रहें, ताकि वह उन पर राज कर सके। पता है इसके लिए उसने क्या किया? उसने लोगों से एक शहर बनाने और शहर के बीच एक बड़ी-सी मीनार बनाने को कहा। अब मीनार बनाने के लिए ईंटों की ज़रूरत थी। क्या आप तसवीर में लोगों को ईंटें बनाते देख सकते हैं? यहोवा परमेश्‍वर को उनका यह काम बिलकुल अच्छा नहीं लगा। क्योंकि वह चाहता था कि लोग एक जगह पर नहीं, दुनिया की अलग-अलग जगहों पर रहें। मगर लोग निम्रोद की बात मानकर कहने लगे: ‘आओ, हम मिलकर एक शहर बनाएँ और उसमें इतनी ऊँची मीनार बनाएँ, जो आसमान से बा...

पहला मेघधनुष

पहला मेघधनुष   कहानी 11 पहला मेघधनुष क्या आपको मालूम है, जब नूह अपने परिवार के साथ जहाज़ से बाहर निकला, तो सबसे पहले उसने क्या किया? उसने परमेश्‍वर के लिए कुछ जानवरों की बलि चढ़ायी। आप यहाँ नीचे दी तसवीर में उसे ऐसा करते हुए देख सकते हैं। यह बलि, नूह की तरफ से परमेश्‍वर के लिए तोहफा था। क्योंकि परमेश्‍वर ने नूह और उसके परिवार की जान बचायी थी। आपको क्या लगता है, क्या परमेश्‍वर नूह के तोहफे से खुश हुआ? जी हाँ, वह बहुत खुश हुआ। इसलिए उसने नूह से वादा किया कि वह फिर कभी बाढ़ से दुनिया का नाश नहीं करेगा। कुछ समय बाद, सारी ज़मीन सूख गयी। नूह और उसके परिवार ने जहाज़ के बाहर फिर से अपना काम-काज शुरू कर दिया। परमेश्‍वर ने उन्हें आशीर्वाद दिया: ‘तुम ढेर सारे बच्चे पैदा करो, ताकि सारी धरती पर लोग हो जाएँ।’ परमेश्‍वर जानता था कि आगे चलकर लोग इस बाढ़ के बारे में सुनकर डर सकते हैं। वे शायद सोचें कि कहीं परमेश्‍वर फिर से बाढ़ न लाए। इसलिए यहोवा ने अपने इस वादे की याद दिलाने के लिए एक निशानी दी। पता है वह निशानी क्या थी? मेघधनुष। मेघधनुष में सुंदर-सुंदर रंग होते हैं। यह अकसर आसमान में तब दिखायी दे...

पूरी धरती पर आयी बाढ़ से लेकर मिस्र से छुटकारे तक

  भाग 2 पूरी धरती पर आयी बाढ़ से लेकर मिस्र से छुटकारे तक पूरी धरती पर आयी बाढ़ में सिर्फ आठ लोग ही बचे। लेकिन फिर उनके बच्चे पैदा हुए और धरती पर इंसानों की गिनती बढ़कर कई हज़ार हो गयी। बाढ़ के 352 साल बाद इब्राहीम पैदा हुआ। इस भाग में हम देखेंगे कि यहोवा ने इब्राहीम से किया अपना वादा निभाया और उसे एक बेटा दिया। इब्राहीम के बेटे का नाम इसहाक था। फिर इसहाक के दो बेटे हुए, जिनमें से परमेश्‍वर ने याकूब को चुना। याकूब का परिवार बहुत बड़ा था। उसके 12 बेटे और कई बेटियाँ थीं। याकूब के 10 बड़े बेटे अपने छोटे भाई यूसुफ से नफरत करते थे। इसलिए उन्होंने यूसुफ को मिस्र के लोगों के हाथों बेच दिया। आगे चलकर, यूसुफ मिस्र का बहुत बड़ा आदमी बन गया। फिर एक बार जब खाने की चीज़ों की बहुत कमी हो गयी, तो यूसुफ के भाई उसके पास खाना खरीदने गए। यूसुफ देखना चाहता था कि क्या अब भी उनके दिल में अपने छोटे भाई के लिए नफरत है। इसलिए उसने अपने भाइयों की एक परीक्षा ली। इसके बाद याकूब का पूरा परिवार मिस्र आ गया। ये सारी बातें इब्राहीम के पैदा होने के 290 साल बाद हुईं। अगले 215 साल तक इस्राएली मिस्र में रहे। यूसुफ के...

पूरी धरती पर आयी बाढ़

पूरी धरती पर आयी बाढ़   कहानी 10 पूरी धरती पर आयी बाढ़ नूह तो अपने परिवार के साथ जहाज़ के अंदर चला गया, लेकिन जो लोग बाहर रह गए थे, उन्हें कोई परवाह नहीं थी। वे बस अपने रोज़ के कामों में लगे रहे, जैसे खाने-पीने और मौज-मस्ती करने में। वे अब भी यही सोच रहे थे कि बाढ़ नहीं आएगी। वे शायद नूह और उसके परिवार पर खूब हँसे होंगे। लेकिन जल्द ही उनका हँसना बंद हो गया। पानी बरसने लगा। इतनी ज़ोरों से बारिश होने लगी, मानो कोई बाल्टी भर-भर के पानी उँडेल रहा हो। नूह की बात सोलह आने सच निकली! अब लोग चाहकर भी जहाज़ के अंदर नहीं घुस सकते थे। क्योंकि यहोवा ने जहाज़ का दरवाज़ा कसकर बंद कर दिया था। देखते-ही-देखते सब जगह पानी भरने लगा। ऐसा लग रहा था मानो हर तरफ बड़ी-बड़ी नदियाँ बह रही हों। पानी इतनी तेज़ी से बह रहा था कि सारे पेड़ गिर गए और बड़े-बड़े पत्थर भी पानी में बहने लगे। चारों तरफ इतना शोर था कि पूछो मत। यह सब देखकर लोग डर के मारे काँपने लगे। वे अपनी जान बचाने के लिए ऊँची-ऊँची जगहों पर चढ़ने लगे। उन्होंने सोचा होगा कि काश, हमने नूह की बात मान ली होती और जहाज़ का दरवाज़ा खुले रहने तक उसमें चढ़ गए ह...

नूह का जहाज़

  नूह का जहाज़ कहानी 9 नूह का जहाज़ नूह की एक बीवी और तीन बेटे थे। उसके बेटों के नाम थे, शेम, हाम और येपेत। नूह के तीनों बेटों की एक-एक बीवी थी। कुल मिलाकर नूह के परिवार में आठ लोग थे। परमेश्‍वर ने नूह को अब एक काम दिया, जो बहुत अजीब था। वह क्या? परमेश्‍वर ने नूह से एक बहुत बड़ा पानी का जहाज़ बनाने को कहा। वह जहाज़ दिखने में एक बड़े और लंबे बक्से जैसा होता। परमेश्‍वर ने नूह से कहा, ‘जहाज़ में तीन मंज़िल बनाना और हर मंज़िल में अलग-अलग कमरे बनाना।’ आखिर ये कमरे किस लिए थे? कुछ कमरों में नूह और उसका परिवार रहता, तो कुछ में जानवर रखे जाते। और बाकी कमरों में सबके लिए ढेर सारा खाना रखा जाता। परमेश्‍वर ने नूह को यह भी बताया कि वह जहाज़ को अंदर और बाहर से राल या डामर से पोत दे, ताकि पानी जहाज़ के अंदर न जा सके। परमेश्‍वर ने नूह से कहा: ‘मैं पूरी धरती पर बाढ़ लाऊँगा और धरती से हर चीज़ मिटा दूँगा। मैं इतना पानी बरसाऊँगा कि सबकुछ डूब जाएगा! सिर्फ वही बचेगा, जो जहाज़ के अंदर होगा।’ नूह और उसके बेटों ने यहोवा की बात मानी और जहाज़ बनाने के काम में जुट गए। मगर दूसरे लोग उन पर हँसने लगे। उन्ह...

धरती पर नफिलीम

धरती पर नफिलीम   कहानी 8 धरती पर नफिलीम सोचिए, आप कहीं जा रहे हैं कि अचानक आपके सामने एक लंबा-चौड़ा आदमी आ जाता है। ऐसे में क्या आप डर नहीं जाएँगे? आज से हज़ारों साल पहले इस धरती पर ऐसे ही लंबे-चौड़े लोग रहा करते थे। वे इतने लंबे होते थे कि अगर आपके घर के अंदर खड़े हो जाते, तो उनका सिर छत से लग जाता। आखिर ये लोग थे कौन? बाइबल इन्हें नेफिलीम कहती है और ये स्वर्गदूतों के बच्चे थे। स्वर्गदूतों के बच्चे, यह कैसे हो सकता है? क्या आपको वह बुरा स्वर्गदूत शैतान याद है, जो लोगों को बिगाड़ने पर तुला हुआ था? वह सिर्फ लोगों को ही नहीं, परमेश्‍वर के अच्छे स्वर्गदूतों को भी बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था। अफसोस, कुछ स्वर्गदूत उसकी बातों में आ गए। उन स्वर्गदूतों ने वह काम करना बंद कर दिया, जो परमेश्‍वर ने उन्हें स्वर्ग में दिया था। क्यों? क्योंकि उन्होंने धरती पर सुंदर-सुंदर औरतों को देखा और वे उनके साथ रहना चाहते थे। फिर क्या था, वे इंसान बनकर धरती पर आए और अपनी-अपनी पसंद की औरतों से शादी कर ली। बाइबल कहती है कि ऐसा करना गलत था, क्योंकि परमेश्‍वर ने स्वर्गदूतों को स्वर्ग में रहने के लिए बनाया ...

एक बहादुर आदमी - हनोक

एक बहादुर आदमी   कहानी 7 एक बहादुर आदमी धरती पर धीरे-धीरे लोगों की गिनती बढ़ने लगी। मगर उनमें से बहुत-से लोग कैन की तरह बुरे काम करते थे। पर एक आदमी उन सबसे अलग था। उसका नाम था, हनोक। हनोक एक बहादुर आदमी था और कोई बुरा काम नहीं करता था। वह परमेश्‍वर का कहना मानता था। क्या आपको मालूम है, उस समय के लोग इतने बुरे काम क्यों करते थे? याद है, किसने आदम और हव्वा से परमेश्‍वर की बात न मानने के लिए कहा था? किसने उन्हें वह फल खाने के लिए कहा था, जिसे खाने से परमेश्‍वर ने मना किया था? जी हाँ, वह कोई और नहीं, एक बुरा स्वर्गदूत था। बाइबल में उसे शैतान कहा गया है। वह सबको अपने जैसा बुरा बनाना चाहता है। एक दिन यहोवा परमेश्‍वर ने हनोक से कहा कि वह सब लोगों को एक बात बताए। वह बात शायद किसी को भी पसंद न आती। जानते हैं वह बात क्या थी? वह यह कि ‘परमेश्‍वर सब बुरे लोगों का नाश करनेवाला है।’ यह बात सुनकर लोगों का चेहरा ज़रूर गुस्से से लाल हो गया होगा। उन्होंने शायद हनोक को मार डालने की भी कोशिश की होगी। सोचिए, ऐसे में लोगों को परमेश्‍वर की बात बताने के लिए हनोक को कितनी बहादुरी से काम लेना पड़ा होग...

एक अच्छा बेटा और एक बुरा बेटा -कैन-और-हाबिल

एक अच्छा बेटा और एक बुरा बेटा   कहानी 6 एक अच्छा बेटा और एक बुरा बेटा ज़रा कैन और हाबिल को देखिए। वे अब बड़े हो गए हैं। कैन एक किसान बन गया है। वह फल-सब्ज़ी और अनाज की खेती करता है। जबकि हाबिल एक चरवाहा बन गया। उसे भेड़ के छोटे-छोटे बच्चों, यानी मेम्नों की देखरेख करना बहुत अच्छा लगता है। धीरे-धीरे ये मेम्ने बड़े हो जाते हैं। इस तरह, हाबिल के पास ढेर सारी भेड़ें हो जाती हैं। एक दिन कैन और हाबिल, दोनों परमेश्‍वर के लिए तोहफा लाए। कैन अपने खेत से कुछ फल-सब्ज़ी लाया और हाबिल अपनी भेड़ों में से अच्छी-से-अच्छी भेड़ें लाया। यहोवा ने हाबिल से खुश होकर उसका तोहफा कबूल कर लिया। पर वह कैन और उसके तोहफे से बिलकुल भी खुश नहीं हुआ। मालूम है क्यों? इसलिए नहीं कि हाबिल का लाया तोहफा कैन के तोहफे से अच्छा था, बल्कि इसलिए कि हाबिल एक अच्छा आदमी था। हाबिल, यहोवा और अपने भाई, दोनों से प्यार करता था। लेकिन कैन बुरा आदमी था। वह अपने भाई हाबिल से प्यार नहीं करता था। परमेश्‍वर ने कैन से कहा कि उसे अच्छा आदमी बनना चाहिए। पर कैन ने परमेश्‍वर की एक न सुनी। उलटा वह गुस्सा हो गया, क्योंकि परमेश्‍वर उससे ज...

मुश्‍किल ज़िंदगी की शुरूआत

मुश्‍किल ज़िंदगी की शुरूआत   कहानी 5 मुश्‍किल ज़िंदगी की शुरूआत अदन बगीचे के बाहर आदम और हव्वा को बहुत-सी मुश्‍किलों का सामना करना पड़ा। पहली बात, अब उन्हें खाना आसानी से नहीं मिलता था। इसके लिए उन्हें बड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। क्योंकि वहाँ मीठे-रसीले फलों के पेड़ नहीं थे। इसके बजाय, चारों तरफ सिर्फ काँटेदार झाड़ियाँ थीं। आदम और हव्वा पर ये सारी मुसीबतें इसलिए आयीं, क्योंकि उन्होंने परमेश्‍वर की बात नहीं मानी और उससे दोस्ती तोड़ दी। लेकन उससे भी बुरा यह हुआ कि अब आदम और हव्वा हमेशा तक नहीं जी पाते। याद है, परमेश्‍वर ने उन्हें पहले ही बता दिया था कि अगर वे उस पेड़ का फल खाएँगे तो मर जाएँगे। उनके साथ वही हुआ। जिस दिन से उन्होंने वह फल खाया उस दिन से वे बूढ़े होने लगे और आखिर में मर गए। सच, परमेश्‍वर की बात न मानकर उन्होंने कितनी बड़ी भूल की! जब आदम और हव्वा को अदन बगीचे से बाहर निकाल दिया गया, उसके बाद ही उनके बच्चे पैदा हुए। इसका मतलब यह हुआ कि अब उनके बच्चों को भी बूढ़ा होना और मरना पड़ेगा। काश! आदम और हव्वा ने यहोवा का कहा माना होता। तब वे और उनके बच्चे सुख से रहते। इतना ही न...

उन्हें अदन बगीचे से बाहर क्यों निकाल दिया गया-फिरदौस-गवाँ-दिया

  उन्हें अदन बगीचे से बाहर क्यों निकाल दिया गया कहानी 4 उन्हें अदन बगीचे से बाहर क्यों निकाल दिया गया अरे, यह क्या हो रहा है? आदम और हव्वा को अदन बगीचे से बाहर निकाला जा रहा है। पर क्यों? वह इसलिए, क्योंकि उन्होंने एक गलत काम किया। और इस वजह से यहोवा उन्हें सज़ा दे रहा है। क्या आपको मालूम है, आदम और हव्वा ने क्या गलत काम किया? बात यह थी कि परमेश्‍वर ने उनसे कहा कि वे अदन बगीचे के सभी पेड़ों से फल तोड़कर खा सकते हैं। लेकिन परमेश्‍वर ने उन्हें एक पेड़ का फल खाने से मना किया था। परमेश्‍वर ने यह भी कहा कि अगर वे उस पेड़ का फल खाएँगे, तो वे मर जाएँगे। और जैसा कि आप जानते हैं, जिस चीज़ को लेने से हमें मना किया जाता है, उसे लेना गलत है। तो क्या आदम और हव्वा ने परमेश्‍वर की बात मानी? चलिए देखते हैं। एक दिन हव्वा बगीचे में अकेली थी। तभी एक साँप आकर उससे बात करने लगा। पता है उसने हव्वा से क्या कहा? उसने हव्वा से कहा कि वह उस पेड़ का फल खा ले, जिसके लिए परमेश्‍वर ने मना किया था। यह बड़ी अजीब बात थी। परमेश्‍वर ने तो साँपों को इस तरह बनाया ही नहीं था कि वे बात कर सकें। फिर तो इसका एक ही मत...

पहला आदमी और औरत-आदम-और-हव्वा

  पहला आदमी और औरत कहानी 3 पहला आदमी और औरत इस तसवीर में ऐसा क्या दिखायी दे रहा है, जो पिछली तसवीर में नहीं था? जी हाँ, इसमें इंसान दिखायी दे रहे हैं। ये पहला आदमी और पहली औरत है। आदमी का नाम आदम है और औरत का नाम, हव्वा। आदम और हव्वा को किसने बनाया? परमेश्‍वर ने। मगर क्या आपको परमेश्‍वर का नाम मालूम है? उसका नाम है, यहोवा। सोचिए, यहोवा परमेश्‍वर ने आदम को कैसे बनाया होगा? उसने ज़मीन से थोड़ी मिट्टी ली, फिर उससे एक इंसान का शरीर बनाया। उस शरीर में कोई कमी नहीं थी। तब परमेश्‍वर ने उसकी नाक में साँस फूँकी और आदम ज़िंदा हो गया। इसके बाद, यहोवा परमेश्‍वर ने आदम को एक काम दिया। उसने आदम से कहा कि वह सब जानवरों के नाम रखे। आदम शायद उन्हें बड़ी देर तक देखता रहा होगा, ताकि वह उनमें से हरेक को कोई अच्छा-सा नाम दे सके। जब आदम जानवरों के नाम रख रहा था, तो उसने कुछ देखा। पता है क्या? उसने देखा कि सब जानवरों के साथी थे। वहाँ पापा हाथी और मम्मी हाथी थे, पापा शेर और मम्मी शेर थे। मगर आदम का कोई साथी नहीं था। तब मालूम है यहोवा ने क्या किया? उसने आदम को गहरी नींद में सुला दिया। फिर उसकी पसली की एक ह...